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इन 5 योगासन से दे अपने दिन को ऊर्जावान और बेहतरीन शुरुआत

इन 5 योगासन से दिन की शुरुआत करने पर आप सारा दिन ऊर्जावान और तारोताजा महसूस करोगे ।

योगासन से आप अपने शरीर के साथ साथ अपने मन को भी फिट रख सकते हो। योग का इतिहास अपने आप में ही बहुत अनोखा है। योग करने से शरीर को एनर्जी मिलती है और मन शांत रहता है। योग के साथ साथ सूर्य नमस्कार भी शरीर को फिट रखने में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सूर्य नमस्‍कार रक्‍त का संचार बढ़ाता है, ऊर्जा का संचार करता है। अपने शरीर को हेल्दी एवं फिट रखने के लिए योग करना बहुत जरूरी है। योग से शारीरिक स्वास्थ्य साथ साथ मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर बना रहता है। सुबह उठने पर शरीर में होने वाली अकड़न को दूर करने और दिन भर रिफ्रेश बने रहने के लिए योगासन बेहद जरूरी हैं। इनकी मदद से कई बीमारियों से न सिर्फ बचाव ही किया जा सकता है, बल्कि इन्‍हें दूर भी किया जा सकता है।

सर्वांग पुष्टि 

यह योगासन करने के लिए मैट पर दोनों पैर फैलाकर सीधे खड़े हो जाएं। अंगूठा अंदर करते हुए मुट्ठी बंद कर ले। उसके बाद दोनों हाथों को नीचे की तरफ झुकाकर बाएं टखने के पास बायां हाथ नीचे और दायां हाथ कलाई के ऊपर रखें। सांस भरते हुए धीरे-धीरे दोनों हाथों से ऊपर की ओर बाएं कन्धे के बाजू से सिर तक ले जाएं और दाएं टखने की तरफ सांस छोड़े। दाहिना हाथ ऊपर बायां हाथ ऊपर रखें। और एक बार फिर से दोबारा सांस लेकर दोनों हाथों के नीचे से ऊपर दाएं कन्धे तक लाते हुए सिर के ऊपर तक ले जाएं। इस बार बाईं तरफ मुड़ते हुए दोनों हाथों को बाएं कन्धे से नीचे तरफ बाएं टखने तक लाएं। सांस छोड़े, हाथ को बदल-बदलकर बायां नीचे और दाहिना ऊपर रखें। इसे दो बार करे। हर अंग की चर्बी घटाने के लिए करें ‘सर्वांग पुष्टि आसन’ बेहतरीन है. लेकिन जो लोग लोअर बैक पेन की समस्या से परेशान हैं वे इस आसन को ना करें।

उदर शक्ति विकासक क्रिया

यह योगासन करने से पेट से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा मिलता है। और साथ ही पेट की चर्बी कम होती है। कुछ लोगों को पाचन संबंधित समस्याएं होती है वो का प्रयोग करके अपनी इस समस्या को आसानी से दूर कर सकते हैं। इसका अभ्यास नियमित तौर से करने पर पेट की चर्बी कम होती है। साथ ही कब्ज में भी लाभ मिलता है। हालांकि हाई ब्‍लल प्रेशर, हर्निया और गर्भवती महिलाओं को आसन नहीं करना चाहिए.

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सूर्य नमस्कार

सभी योगासनों में से सूर्य नमस्कार को सबसे ज्यादा पावरफुल योगासन माना जाता है। यह एक ऐसा योग है जो आपको शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखता है। लेकिन सूर्य नमस्कार को करने का सही तरीका बहुत कम लोग जानते हैं।

  • प्रणाम आसन- प्रणाम आसन को करने के लिए आप अपने दोनों पंजे जोड़कर अपने आसन मैट के किनारे पर खड़े हो जाएं। फिर दोनों हाथों को कंधे के समान्तर उठाएं और पूरा वजन दोनों पैरों पर समान रूप से डालें। दोनों हथेलियों के पृष्ठभाग एक दूसरे से चिपकाए रहें और नमस्कार की मुद्रा में खड़े हो जाएं।
  • हस्ततुन्नासन- यह आसन को करने के लिए सबसे पहले गहरी सांस भरें और अपने दोनों हाथों को ऊपर की तरफ उठाएं। उसके बाद हाथ और कमर को झुकाते हुए दोनों भुजाओं और गर्दन को भी पीछे की ओर झुकाएं।
  • हस्तपाद आसन- इस आसन में बाहर की तरफ सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की तरफ नीचे की ओर झुकें। अपने दोनों हाथों को कानों के पास से घुमाते हुए ज़मीन को छूएं।
  • अश्व संचालन आसन- इस आसन में अपनी हथेलियों को ज़मीन पर रखें, सांस लेते हुए दाएं पैर को पीछे की तरफ ले जाएं और बाएं पैर को घुटने की तरफ से मोड़ते हुए ऊपर रखें. गर्दन को ऊपर की तरफ उठाएं और कुछ देर इसी स्थिती में रहें.
  • पर्वत आसन- इस आसने को करने के दौरान सांस लेते हुए बाएं पैर को पीछे ले जाएं और पूरे शरीर को सीधी रेखा में रखें और अपने हाथ ज़मीन पर सीधे रखें.
  • अष्टांग नमस्कार- इस आसन को करते वक्त अपने दोनों घुटने ज़मीन पर टिकाएं और सांस छोड़ें. अपने कूल्हों को पीछे ऊपर की ओर उठाएं और अपनी छाती और ठुड्डी को ज़मीन से छुआएं और कुछ देर इसी स्थिति में रहें.
  • भुजंग आसन- इस आसन को करते वक्त धीरे-धीरे अपनी सांस छोड़ते हुए छाती को आगे की और ले जाएं. हाथों को ज़मीन पर सीधा रखें. गर्दन पीछे की ओर झुकाएं और दोनों पंजों को सीधा खड़ा रखें.
सूर्य नमस्कार के फायदे

सूर्य नमस्कार करने से स्ट्रेस दूर होता है, बॉडी डिटॉक्स होती है और मोटापा घटता है. जिन महिलाओं को मासिक धर्म की समस्या है यह उनके लिए काफी लाभकारी होता है. रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है.

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शवासन

मैट पर पीठ के बल सीधे लेट जाएं और आंखें मूंद लीजिए. पैरों को आराम की मुद्रा में हल्का खोल कर रखें. पैर के तलवे और उंगलियां ऊपर की तरफ होनी चाहिए. हाथों को बगल में रखकर हथेलियों को ऊपर की तरफ खोलकर रखें. पैर से लेकर शरीर के हर भाग पर ध्यान केंद्रित करते हुए धीरे-धीरे सांस अन्दर बाहर करें. धीरे धीरे इसे कम करें. जब शरीर में राहत महसूस हो तो आंखों को बंद करके ही थोड़ी देर उसी मुद्रा में आराम करें.

अनुलोम विलोम प्राणायाम

सबसे पहले पालथी मार कर सुखासन में बैठें. इसके बाद दाएं अंगूठे से अपनी दाहिनी नासिका पकड़ें और बाई नासिका से सांस अंदर लें लीजिए. अब अनामिका उंगली से बाई नासिका को बंद कर दें. इसके बाद दाहिनी नासिका खोलें और सांस बाहर छोड़ दें. अब दाहिने नासिका से ही सांस अंदर लें और उसी प्रक्रिया को दोहराते हुए बाई नासिका से सांस बाहर छोड़ दें.

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